मेरे दिलमें, तू ही तू है..
दिलकी दवाँ, क्या करूं?
दिलभी तू है, जाँ भी तू है..
तुझपे फिदा क्या करुं?
खुदको खोके, तुझको पाँकर..
क्या क्या मिला क्या कहूं?
तेरी होके, जीनेमे क्या..
आया मजा क्या कहूं?
कैसे दिन है, कैसी रातें
कैसी फिजा, क्या कहूं?
मेरी होकर, तुने मुझको
क्या क्या दिया, क्या कहूं?
मेरे पहलूं, में जब तू है
फिर मै, दुवा क्या करुं?
दिलभी तू है, जाँ भी तू है..
तुझपे फिदा क्या करुं?
तुझपे फिदा क्या करुं?
है ये दुनिया, दिलकी दुनिया
मिलके रहेंगे यहाँ..
लुटेंगे हम, खुशिया हरपल
दुःख न सहेंगे यहाँ..
अरमानोंके, चंचल धारे
ऐसे बहेंगे यहाँ..
ये तो सपनों, की जन्नत है
सबही कहेंगे यहाँ..
ये दुनिया मेरे, दिलमें बसी है
दिलसे जुदा, क्या करुं?
(जगजीत आणि चित्रा सिंग..)
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